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आम आदमी की जेब काटने को तैयार आप सरकार

नई दिल्ली, (वेबवार्ता)। दिल्ली वालों पर महंगाई का बोझ पड़ने वाला है। दरअसल, केजरीवाल सरकार ने सोमवार को विधानसभा में 14 चीजों पर वैट बढ़ाने के लिए बिल पेश कर दिया। इन 14 चीजों में पेट्रोल और डीजल भी शामिल है।

डीजल पर फिलहाल साढ़े बारह फीसदी वैट लगता है, जो इस बिल के पास हो जाने के बाद वैट 30 फीसदी हो जाएगा। जबकि पेट्रोल पर अभी दिल्ली में 20 फीसदी वैट लगता है, जिसे बढ़ाकर 30 फीसदी किया जाएगा. इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।

हवाई ईंधन, स्प्रिट, गैसोलिन, भट्टी का तेल, मोम (मोमबत्ती शामिल नहीं), भारत में बनी विदेशी शराब, भारतीय शराब, नारकोटिक्स, लॉटरी टिकट, तंबाकू, गुटखा, बीड़ी और 5 हजार रुपये से महंगी घडि़यां शामिल हैं. इन सभी चीजों पर अभी 20 फीसदी वैट लगाता है, जो इस बिल के पास होने के बाद 30 फीसदी हो जाएगा।

आज भी लोकप्रिय हैं मोदी



मोदी सरकार को आए एक वर्ष हो चुका है और उसकी एक वर्ष की उपलब्धियों पर खूब चर्चाएं चल रही हैं। जहां विरोधी दल काले धन की वापसी और अच्छे दिनों की बात कर सरकार को घेरने का प्रयास का रहे हैं वहीं सरकार अपनी उपलब्धियां गिनाकर जनमत को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है।

जनमत सर्वेक्षण बताते हैं कि जनता ने भी प्रधानमंत्राी नरेंद्र मोदी की सरकार के एक वर्ष की उपलब्धियों को आशा की एक किरण माना है पर वे अभी और बहुत कुछ पाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इंडिया टुडे ग्रुप द्वारा किए गये सर्वे के अनुसार अच्छे दिनों की चर्चा होने पर 34 प्रतिशत लोगों का मानना था कि अच्छे दिन आ गये हैं किंतु 53 प्रतिशत लोगों का मानना था कि अच्छे दिन अभी नहीं आये हैं।

मोदी की उपलब्धियों के बारे में पूछे जाने पर 25 प्रतिशत का मानना था कि मूल्य वृद्धि रोकना मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि रही है। 22 प्रतिशत लोगों ने उनकी विदेश नीति की सफलता को उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि माना जबकि 17 प्रतिशत लोगों ने स्वच्छ भारत कैंपेन को उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि बताया। 16 प्रतिशत लोगों ने भ्रष्टाचार कम करने को उनकी सबसे बड़ी उपलबिध बताया। कुल मिलाकर 20 प्रतिशत जनता ने मोदी सरकार के कार्य को बहुत अच्छा, 36 प्रतिशत जनता ने अच्छा, 25 प्रतिशत जनता ने सामान्य और केवल 14 प्रतिशत लोगों ने खराब बताया।

मोदी सरकार की विफलताओं की चर्चा करें तो 30 प्रतिशत लोगों ने मोदी सरकार द्वारा किसानों को संतुष्ट न कर पाने को उनकी बड़ी असफलता माना जबकि 28 प्रतिशत लोगों ने रोजगारों की संख्या कम बढ़ने को उनकी विफलता बताया। धार्मिक असहिष्णुता को केवल 8 प्रतिशत लोगों ने मोदी सरकार की विफलता बताया।

मोदी सरकार की चुनौतियां:-

किसानों की हालत सुधारने को 16 प्रतिशत लोगों ने मोदी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बताया तो 15 प्रतिशत लोगों ने आर्थिक विकास को सबसे बड़ी चुनौती बताया। 13 प्रतिशत लोगों के अनुसार भ्रष्टाचार रोकना उनके लिए बहुत बड़ी चुनौती है जबकि मात्रा 11 प्रतिशत लोगों ने महंगाई को सबसे बड़ी चुनौती बताया।

मोदी सरकार की प्रारंभ की गई योजनाओं में 31 प्रतिशत जनधन योजना को सबसे अच्छी योजना बताया तो 23 प्रतिशत स्वच्छ भारत अभियान को सबसे प्रभावशाली योजना बताया। 41 प्रतिशत लोगों का मानना था कि मोदी सबके विकास के लिए कार्य करते हैं जबकि 26 प्रतिशत लोगों का मानना था कि वे बड़े उद्योगपतियों के लिए कार्य करते हैं। 23 प्रतिशत लोगों ने उन्हें गरीबों के लिए कार्य करने वाला बताया। 51 प्रतिशत लोगों का मानना था कि उन्हें मोदी के शासन में कोई खतरो नहीं है।

यदि आज चुनाव हो जाएं तो आप किसे वोट देंगे, यह पूछे जाने पर 32 प्रतिशत लोगों का कहना था कि वे भाजपा के लिए वोट करेंगे जबकि लोकसभा चुनाव में उन्हें 31 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए थे। एनडीए के लिए वोट करने वालों का प्रतिशत 38.4 से बढ़कर 39 प्रतिशत हो गया है जबकि यूपीए के लिए वोट करने वालों का प्रतिशत 21.7 प्रतिशत से बढ़कर 23 प्रतिशत हो गया है। इस प्रकार एक वर्ष में नरेंद्र मोदी और उनकी एनडीए सरकार की लोकप्रियता में कुल मिलकर वृद्धि हुई है।

-अशोक गुप्त

चीन की चालाकी



देश के किसी भी बाजार में चले जाइए। मशीनरी से लेकर खिलौने तक मेड इन चाइना बिक रहे हैं। भारतीय बाजार की अर्थव्यवस्था पर चीनी हावी होते जा रहे हैं। क्यों?जबकि किसी भी मानक पर वह देसी सामान के सामने नहीं टिकते, सिर्फ कीमत के अलावा। तो क्या हिंदी चीनी भाई भाई का नारा लगाने वाला देश, कहीं अपने भाई की रीढ़ तोड़ने में तो नहीं लगा है। दोनांे देशों के बीच व्यापार असंतुलन के आंकड़े तो यही कहते हैं।

2015 तक जहां चीनी हिस्सा 54.2 अरब डाॅलर रहा, वहीं भारत 16.4 अरब डाॅलर का ही निर्यात कर पाया। हमारे बाजार में बिजली के उपकरण, सीमंेट, आॅर्गेनिक कैमिकल्स, परमाणु रिएक्टर, बाॅयलर्स, भारी मशीनरी, सिल्क, खनिज, ईंधन और तेल सभी पर चीन छाया हुआ है।

यह आंकड़ा तो उन वस्तुओं का है जो दोनों सरकारों के मध्य व्यापार समझौतों के तहत आयात निर्यात की जाती है। हर साल भारतीय बाजार में अवैध रूप से आने वाला चीनी माल इससे कई गुना ज्यादा है। कैसे यह सब माल सीमा पार कर हमारी अर्थव्यवस्था को खोखला करने पहुंच जाता है?बिना कस्टम विभाग की मिलीभगत के यह संभव हो ही नहीं सकता।

चीन का सामान मुख्यतः सड़क के जरिए नाथूला दर्रे से, समुद्र के रास्ते और कारगो विमान से आता है। फिर कस्टम की नजर से कैसे बच निकलता है?सरकार को अपने कंटेनर डिपो पर जांच सख्त करवानी होगी तथा अवैध रूप से भारत में चीनी माल खपाने वालों या बेचने वालों को कड़ी सजा दिलानी होगी।

ऐसे चीनी सामान जो भारत में देसी उत्पादों को गुणवत्ता में तो नहीं हरा पाते लेकिन दाम में पस्त कर देते हैं उन पर एंडी डंपिंग ड्यूटी लगानी चाहिए ताकि हमारे उद्योग धंधों पर संकट दूर हो सके।

केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद पहले चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग भारत आए और हाल ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन का दौरा करके आए हैं। दोनों ही दौरों का खूब प्रचार हुआ। समझौते हुए। द्विपक्षीय व्यापार बढ़ने के सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर हुए लेकिन नरेंद्र मोदी के भारत लौटते ही चीन ने 2025 तक मेक इन चाइना का नारा दे दिया।

भारत से 22 अरब डाॅलर की डील की तो साथ ही पाकिस्तान से 46 अरब डाॅलर का व्यापार समझौता कर लिया। चीन के साथ हमारे संबंधों का पिछला अनुभव कभी उत्साह बढ़ाने वाला नहीं रहा। तमाम समझौतों और वादों के बावजूद बीजिंग में बैठी सरकार हमारे विरोधियों को न सिर्फ सामरिक बल्कि आर्थिक मदद देती रही है। इसके अलावा विवादित द्विपक्षीय मुद्दों पर नकारात्मक रूख के अलावा हमारी सीमाओं पर घुसपैठ की कोशिशें लगातार जारी हैं।

भारत सरकार को लाल सलाम के पीछे का सच समझना होगा। चीन से अवैध व्यापार पर लगाम कसनी होगी वरना मेक इन इंडिया का नारा हकीकत में बदलना मुश्किल होगा।

-नरेन्द्र देवांगन

अनुष्का के साथ कभी अफेयर नहीं था-रणवीर सिंह

रणवीर सिंह काम के साथ रोमांस को लेकर हमेशा खबरों में बने रहते हैं। शुरूआती दौर में अनुष्का शर्मा के साथ नाम जुड़ने के बाद अब दीपिका पादुकोण के साथ अफेयर के कारण चर्चाओं में है। दोनों संजय लीला भंसाली की ’बाजीराव मस्तानी’ कर रहे हैं।

शाहरूख की तरह रणवीर सिंह बाॅलीवुड के दूसरे ऐसे स्टार हैं जो शूटिंग के दौरान बार बार चोट ग्रस्त हो जाते हैं। ’गुंडे’ की शूटिंग के दौरान वह पहली बार घायल हुए थे। ’बाजीराव मस्तानी की शूटिंग के दौरान उनके हाथ में फ्रेक्चर हुआ जिसकी वजह से कई हफ्ते तक शूटिंग रूकी रही। अब वे फिर से शूटिंग पर लौटने की तैयारी में हैं।

प्रियंका और दीपिका के साथ अगला शैडयूल शुरू होने जा रहा है लेकिन डाॅक्टर्स ने उन्हें एक्शन सीन की शूटिंग करने से मना कर दिया है। इसके लिए अभी उन्हें चार महीने का वक्त और लगेगा। यह पूरी फिल्म एक्शन पर आधारित है। इस कारण बाजीराव मस्तानी की क्रिसमस रिलीज टल सकती है।

17 वीं सदी के मराठा वारियर के इस किरदार को साकार करने के लिए जी जान से जुटे हैं। संजय उनके काम से बेहद खुश हैं। रणवीर सिंह को ’बाजीराव मस्तानी’ से कितना फायदा हो सकेगा, यह रिलीज के बाद ही पता चल सकेगा लेकिन फिलहाल उन्हें किसी नई फिल्म का आॅफर नहीं मिल रहा है।

5 जून को प्रदर्शित जोया अख्तर की ’दिल धड़कने दो’ ने वीकेंड पर 22 करोड़ का बिजनेस कर शानदार ओपनिंग ली। बिखरी हुई मेहरा फैमिली की कहानी पर आधारित इस फिल्म में रणवीर सिंह कबीर मेहरा के किरदार में नजर आए। अनुष्का शर्मा फिल्म में फराह नाम की साधारण पर महत्वाकांक्षी युवती हैं। अनुष्का के साथ उनकी आॅन स्क्रीन कैमिस्ट्री को काफी पसंद किया जा रहा है। यहां प्रस्तुत हैं डेशिंग रणवीर कपूर के साथ की गई बातचीत के अंशः-

अनुष्का के साथ आपका अफेयर रहा है। फिर आप अलग अलग रास्तों पर चले गये। अरसे बाद उनके साथ ’दिल धड़कने दो’ करते हुए कैसा महसूस हुआ?

हम दोनों ने दो रोमांटिक फिल्में साथ की थी तो मीडिया और लोगांें ने ऐसा मान लिया कि हमारे बीच कोई चक्कर चल रहा है। हमें लेकर कई मनगढ़ंत किस्से रच दिये गये। कई तरह की कहानियां बनती चली गईं। हमने इस बारे में कभी कुछ कहा ही नहीं लेकिन लोगों ने खुद यह अंदाज लगा लिया कि हम दोनों डेट कर रहे हैं।

इतने साल बाद एक एक्ट्रेस के रूप में आपको अनुष्का में क्या परिवर्तन नजर आया?

एक एक्ट्रेस के रूप में मैं अनुष्का को बहुत पसंद करता हूं। उनके साथ दोबारा काम करने का अनुभव बहुत अच्छा साबित हुआ। ’एनएच 10’ में उनका काम देखकर उनकी ग्रोथ का अंदाज हर किसी को हो जाता है। एक एक्ट्रेस के रूप में उन्होंने काफी तरक्की कर ली है।

आज आप अनुष्का के साथ अपने रिलेशन को मनगढं़त और लोगों द्वारा अनुमानित बताते हैं। दीपिका के साथ अपने रिलेशन को किस तरह डिफाइन करेंगे?

इस रिश्ते को डिफाइन नहीं किया जा सकता, सिर्फ महसूस किया जा सकता है। दीपिका मेरी जिंदगी में क्या जगह रखती हैं, इसे मैं बहुत ही बेहतर तरीके से जानता हूं। मैं उसका ढिंढोरा पूरी दुनिया में क्यों पीटूं।

आपकी चर्चा आपके काम और आपकी फिल्मों के बजाए दीपिका के साथ आपके रिलेशन को लेकर ज्यादा होती है?

मैं रोमांटिक इंसान हूं पर अपनी पहचान अपनी फिल्मों और अपनी एक्टिंग टेलेंट से बनाना चाहता हूं। अगर मेरी चर्चा मेरी फिल्मों की वजह से होगी तो मुझे ज्यादा खुशी होगी।

दिल धड़कने दो’ आपके लिए किस मायने में खास रही?

यह मेरे लिये इसलिए खास है कि मुझे इसमें अनिल कपूर के साथ काम करने का मौका मिला। अनुष्का, जिनके साथ मेरी अच्छी केमिस्ट्री रही है, उनके साथ अरसे बाद काम करने का मौका मिला। इस फिल्म का हिस्सा बनकर बेहद खुश हूं।

प्रियंका चोपड़ा ’गुंडे’ में आपकी हीरोइन थीं। ’बाजीराव मस्तानी’ में वे आपकी बीवी का किरदार निभा रही हैं। ’दिल धड़कने दो’ में उनके भाई का किरदार निभाते वक्त आपको कुछ अज़ीब सा महसूस नहीं हुआ?

हम कलाकार हैं और हमारे सामने इस तरह की चुनौतियां आती रहती हैं। हमें उन पर हर हाल में खरा उतरना पड़ता है। इस तरह के किरदार निभाने से पहले हमें अपने दिलो दिमाग को स्लेट की तरह साफ करके खुद को निर्देशक के हवाले करना पड़ता है।

प्रियंका चोपड़ा को आप खूबसूरत ज्यादा मानते हैं या फिर वे काबिल ज्यादा हैं?

मैं प्रियंका को तीन साल से जानता हूं। वह अपने किरदार के हिसाब से खुद को बड़ी खूबसूरती के साथ ढाल लेती हैं। वह जितनी खूबसूरत हैं, उतनी ही काबिल एक्ट्रेस भी हैं। उनके अंदर और भी बहुत सारी खूबियां हैं।

आप अनिल कपूर के फैन रहे हैं। उनके साथ ’दिल धड़कने दो’ में काम करने का अनुभव कैसा रहा?

वे बच्चन साहब की तरह लिविंग लीजेंड हैं। वे मेरे स्क्रीन आइडल रहे हैं। उनके साथ काम करना मेरे लिए सपने के सच होने जैसा है। उनका सैंस आॅफ हयूमर कमाल का है। शूटिंग के दौरान उनके साथ गहरे दोस्ताना रिश्ते कायम हुए, हम साथ जिम जाते थे।

-सुभाष शिरढोनकर

 

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